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बिहार में बाढ़ का तांडव: हिलसा में दशकों पुरानी भूल का खामियाजा भुगत रहे लोग, सात इंजीनियर निलंबित



पटना, बिहार। मॉनसून की पहली फुहार के साथ ही बिहार में बाढ़ ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है, खासकर नालंदा जिले के हिलसा अनुमंडल में स्थिति गंभीर बनी हुई है। यहां के निवासियों को दशकों पुरानी एक इंजीनियरिंग चूक का भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, जिसने क्षेत्र को दोहरी चुनौती, कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे की विडंबना में उलझा दिया है।


दशकों पुरानी 'भूल' का दर्द:

जानकारी के अनुसार, 1962 में मुहाने नदी के मुख को बंद करने का फैसला, जो फल्गु नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए लिया गया था, अब पश्चिमी हिलसा के लिए हर साल की बर्बादी का सबब बन गया है। फल्गु का अतिरिक्त पानी यहीं जमा होकर तबाही मचा रहा है। वहीं, इसी अनुमंडल का पूर्वी हिस्सा पानी की कमी से जूझ रहा है, जहां किसानों को सिंचाई के लिए तरसना पड़ता है। जल संसाधन विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार का मत है कि मुहाने नदी का मुख खोलना एक स्थायी समाधान हो सकता है, जिससे पानी का उचित बँटवारा होगा और दोनों समस्याओं से निजात मिल सकेगी।


ताजा हालात और प्रशासनिक कार्रवाई:

ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोकाईन नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि से एकंगरसराय प्रखंड के केशोपुर, मंडाछ और बेलदारी बिगहा सहित हिलसा के धुरी बिगहा में कई तटबंध टूट गए हैं। इन इलाकों में रिहाइशी क्षेत्रों तक में पानी घुस गया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त है। नालंदा और जहानाबाद जिलों में कुल मिलाकर छह स्थानों पर बांध क्षतिग्रस्त हुए हैं।

इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, एकंगरसराय के कार्यपालक अभियंता सहित सात इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है। उन्होंने सभी प्रमुख बांधों और तटबंधों की 24 घंटे निगरानी के आदेश दिए हैं। एनडीआरएफ (NDRF) और आपदा प्रबंधन की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और नावों के माध्यम से राहत सामग्री वितरित की जा रही है।

नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। हालांकि, ग्रामीणों का मानना है कि राहत और मरम्मत कार्यों की गति अभी भी धीमी है।

अन्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्र:

सिर्फ हिलसा ही नहीं, बल्कि गंगा, कोसी, गंडक, पुनपुन, बूढी गंडक, बागमती और फल्गु जैसी बिहार की कई अन्य नदियों का जलस्तर भी नेपाल और झारखंड में हुई भारी बारिश के कारण तेजी से बढ़ रहा है। जहानाबाद में भूतही नदी और नालंदा में लोकाइन नदी में भी "फ्लैश फ्लड" के कारण जमींदारी और लघु बांध क्षतिग्रस्त हुए हैं।

यह देखना होगा कि सरकार इस दशकों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान कब तक निकाल पाती है, ताकि हिलसा के लोग बाढ़ और सूखे के इस दोहरे अभिशाप से मुक्ति पा सकें।

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